
Sustain Humanity
Tuesday, October 25, 2016
এই ছিলকী তোমার মনে। কোথায় গেল উদ্বাস্তু দরদ

The Citizenship (Amendment) Bill, 2016
| Security / Law / Strategic affairs |
The Citizenship (Amendment) Bill, 2016 |
Highlights of the Bill
Key Issues and Analysis
http://www.prsindia.org/billtrack/the-citizenship-amendment-bill-2016-4348/ |
Monday, October 24, 2016
সত্যি সেলুকাস্ কি বিচিত্র এদেশ ভারতবর্ষ!
অথচ এইতো কদিন আগে বিড়ার অসুর স্মরণ সভায় বাঁধা দলিতের জন্য দলিতেরাই তারা একবার ভেবে দেখলনা আমার জাতির লোক যখন বলছে তখন সহযোগিতা না করি একবার এর সত্যতা বা উপযোগীতা যাচাই করে দেখি।
এব্যাপারে উচ্চবর্ণ সমাজ একদম সোচ্চার নিজেদের স্বার্থে।যখন তখন নিয়ম তৈরি করে।
সত্যি সেলুকাস্ কি বিচিত্র এদেশ ভারতবর্ষ!
বিশিষ্ট গান্ধীবাদী স্বাধীনতা সংগ্রামী পদ্মভূষণ ও আনন্দ পুরস্কারপ্রাপ্ত লেখক কেন্দ্রীয় খাদি বোর্ডের অধিকর্তা শৈলেশকুমার বন্দ্যোপাধ্যায় আজ সকাল সাড়ে 6 টায় প্রয়াত হয়েছেন ।
Emanul Haque
বিশিষ্ট গান্ধীবাদী স্বাধীনতা সংগ্রামী পদ্মভূষণ ও আনন্দ পুরস্কারপ্রাপ্ত লেখক কেন্দ্রীয় খাদি বোর্ডের অধিকর্তা শৈলেশকুমার বন্দ্যোপাধ্যায় আজ সকাল সাড়ে 6 টায় প্রয়াত হয়েছেন ।
বেলা 1.30 টার সময় তাঁর দেহ নীলরতন সরকার হাসপাতালের অ্যানাটোমি বিভাগে দান করা হয়.।
মৃত্যু কালে তাঁর বয়স হয়েছিল 90।
জন্ম 10 মার্চ 1926 বিহারের সিংভূমে।
1942 ভারত ছাড়ো আন্দোলনে যোগ দিয়ে জেলে যান। গান্ধীর শিষ্য । সর্বোদয় ভূদান আন্দোলনে সক্রিয় ভূমিকা নেন।
40 গ্রন্থের লেখক ।।
গান্ধী পিস ফাউন্ডেশনের প্রথম সম্পাদক ।।
হেরিটেজ কমিশনের প্রথম চেয়ারম্যান ।
পেয়েছেন আনন্দ পুরস্কার ।
জিন্না: পাকিস্তান,দাঙ্গার ইতিহাস তাঁর অন্যতম প্রধান গ্রন্থ ।।
তাঁর দুই কন্যা ও এক পুত্র বর্তমান।
ভাষা ও চেতনা সমিতির পক্ষে তাঁর মৃত্যুতে শ্রদ্ধা জানান হয়।।
দেহ নিয়ে যাওয়া হয় নীলরতন হাসপাতালে। ।

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Sunday, October 23, 2016
ভাষা পরে, জাতি আগে। ভেবে পুলকিত হই। আর কী হবার থাকে?
Sushanta Kar
এটা বেশ জমেছে অসমিয়া বাঙালি হিন্দুর একাংশ শঙ্কিত আসাম না কাশ্মীর হয়ে যায়। আর অসমিয়া হিন্দু-মুসলমানের আতঙ্ক অসম না ত্রিপুরা হয়ে যায়। দুটোর মধ্যে যে তফাৎ কোথায়, বহু ভেবেচিন্তেও পেলাম না। দুটোরই উৎস ব্যাপক পরজাতি বিদ্বেষ। হিন্দুত্ববাদী আশা করেন, সব মুসলমান হিন্দু হয়ে যাবেন। ঘরওয়াপসি তার চরম নজির। না হলেও মুসলমানে দুর্গাপুজো করাকে যেভাবে কেউ কেউ সাম্প্রদায়িক সম্প্রিতীর নজির হিসেবে দেখেন, প্রতিতুলনাতে মুহরমের তাজিয়াতেও বহু হিন্দু যখন যোগ দেন, সেসব খুব গুরত্ব পায় না সেসব 'অসাম্প্রদায়িক' হিন্দুর ভাবনাতে। অন্যদিকে অসমিয়া মাত্রেরই আশা অসমে সবাই অসমিয়া হয়ে যাবেন। যারা নিজেদের উগ্রজাতীয়তাবাদ বিরোধী বলে ভাবেন, তার মধ্যে বড় অংশ নিজেদের শ্রমিক শ্রেণির মার্ক্সবাদী তাত্ত্বিক বলেও ভাবেন, তাদেরও মনে বড় দুঃখ এতোদিন আসামে থেকেও বাঙালি হিন্দু অসমিয়া হলেন না। মুসলমানের এক অংশ কেমন তরতরিয়ে হয়ে গেছেন। অমলেন্দু গুহের মতো ব্যক্তিত্বের অসমিয়া চর্চা তাই যত সম্নান পায়, হোমেন বরগোঁহাই, বা নিরূপমা বরগোঁহাইর বাংলা চর্চা সেরকম মর্যাদা পায় না। মানে দাঁড়াল এই যে আসামে থাকলে আপনি হয় হিন্দুত্ববাদী হোন, অথবা অসমিয়া। মুসললমানত্ব নিয়ে দাঁড়ালে বহু বাঙালি হিন্দুও ক্ষেপে যাবেন, সেই বাঙালি হিন্দু--যার বাঙালিয়ানাকে সে নিজেও মনে করে ডাস্টবিনে ফেলে দেবার জিনিস। এ ব্যাপারে বরাক ব্রহ্মপুত্রের বাঙালির বিশেষ ইতর বিশেষ নেই। বরাক উপত্যকাতে ১৯ মে এলে শহুরে মধ্যবিত্তেরা কিছু ঢোল পিটিয়ে ১১ শহীদের পুজো টুজো করেন। হিন্দু-মুসলিম ভাই ভাই বলেন। সেসব শহুরে হুজুগে পনা। কেউ কেউ কাগজে এই নিয়ে নিবন্ধ লিখে বাহবা কুড়ান। মনে মনে সবাই জানেন, অসমে থাকতে হলে 'হিন্দুত্বই সেরা পথ'। সেদিন তাই এক কংগ্রেসী নেতাও বলেই ফেললেন, ভাষা পরে, জাতি আগে। ভেবে পুলকিত হই। আর কী হবার থাকে?
हैकर्स और साइबर अपराधियों के निशाने पर है आपका आधार नंबर भी आधार नंबर बैंक खाते से जोड़ने के बहाने सांसदों पर निशाना तो आम लोगों का क्या हाल होना है पलाश विश्वास
हैकर्स और साइबर अपराधियों के निशाने पर है आपका आधार नंबर भी
आधार नंबर बैंक खाते से जोड़ने के बहाने सांसदों पर निशाना तो आम लोगों का क्या हाल होना है
पलाश विश्वास
माकपा के राज्यसभा सांसद ऋतव्रत बंदोपाध्याय को उनके बैंक एकाउंट को आधार नंबर से जोड़ने के बहाने साइबर अपराधी गिरोह ने टार्गेट बनाने की कोशिश की और तकनीकी तौर पर बेहतर युवा सांसद ने बैंक खाता और डिबिट कार्ड के सिलसिले में उनके सवालों से असल खतरा भांप लिया और तुंरत पुलिस से संपर्क किया।
हुआ यह कि ऋतव्रत के पास एक फोन कल आया और काल करने वाले ने अंग्रेजी में निवेदन किया कि वह एसबीआई की शाखा से बोल रहा है।चूंकि एसबीआई ने पिन समेत डाटा चुरा लिये जाने की वजह से लाखों डेबिट कार्ड ब्लाक कर लिये हैं,तो उन्हें दोबारा जारी करने के सिलिसले में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की समस्य़ा प्रातमिकता के स्तर पर सुलझाने के लिए एसबीआई ने हमें जिम्मेदारी सौंपी है।
सांसद से आधार ब्यौरा के साथ साथ डेबिट कार्ट के ब्यौरे पर लगातार सवाल वह करता रहा इस दलील पर कि ऋतव्रत का बैंक खाता आधार नंबर से जुड़ा नहीं है और वह डेबिट कार्ड का मसला सुलझाने के लिए खाते को आदमर नंबर से जोड़ने के लिए मदद की पेशकश कर रहा था।
सांसद को शक हुआ तो उन्होंने कहा कि अगर आधार नंबर से जुड़ा न होना कोई समस्या है तो उनका सचिव बैंक जाकर यह अधूरा काम पूरा कर सकते हैं।इसपर भी जब पूछताछ का सिलसिला नहीं थमा तो सांसद ने सीधे कह दिया कि वे उसे कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं औरइस बारे में पुलिस को सूचित कर रहे हैं।
खास बात तो यह है कि काल करने वालों को उनके बैंक खाते के बारे में सबकुछ मालूम था।राज्यसभा के सांसद के पार्लियामेंट एसबीआई शाखा का खाता आधार नंबर से जुड़ा नहीं है,यह तथ्य ऐसे अपराधी तत्वों के पास कैसे पहुंच गया।क्योंकि पुलिस को टेलीकालर के मोबाइल नंबर का अभी कोई अता पता नहीं मिल रहा है।
सांसद ने पुलिस को जानकारी देने के अलावा भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य को पत्र भी लिखा है।
सांसद ने माना कि चुस्त अंग्रेजी में उनके बैंक काते के बारे में सही जानकारी के सात उनका आधार नंबर जोड़ने की पेशकश से शुरुआत में वे भी दुविधा में पड़ गये थे।
कल ही हमने इस खतरे से आगाह किया था कि आधार नंबर का इस्तेमाल अपराधीि गिरोह कर सकते हैं और बैंक के सुरक्षा इंतजाम इस सिलसिले में धोखाधड़ी रोकने के लिए काफी नहीं है।
जब सीधे भारत के सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है आधार नंबर को लेकर तो आधार की जानकारी वाणिज्यिक संस्थाओं और अपराधी गिरोह के हात लगने पर संकट कितना गहरा होगा,इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
कल जिन बिंदुओं पर मैंने आगाह किया था,कृपया उन पर गौर करेंः
केंद्र सरकार ने माल वेयर गोत्र के वाइरल साफ्ट वेयर के जरिये 32 लाख डेबिट कार्ड के तमाम तथ्यों के लीक हो जाने के मामले पर जांच करा रही है तो 130 करोड़ नागरिकों के आधार नंबर से जुड़े तथ्य लीक होने पर वह क्या करेंगी,हमें इसका अंदाजा नहीं है।
देश के सबसे बड़े कारपोरेट वकील इस फर्जीवाड़े से निबटने के लिए आम जनता को भरोसा दिला रहे हैं,लेकिन कुकिंग गैस,बैंकिंग,राशन,वोटर लिस्ट,वेतन,पेंशन,रेलवे जैसे विशाल नेटवर्क से जब सारे तथ्य लीक या हैक हो जाने की स्थिति से सरकार कैसे निपटेगी जबकि सिर्फ बत्तीस लाख डेबिट कार्ड लीक हो जाने से देश की बैंकिंग सिस्टम अभूतपूर्व संकट में है।
देशभर में सिर्फ 32 लाख नहीं, बल्कि 65 लाख डेबिट कार्डों का डाटा चोरी होने की आशंका है।यह संख्या भी आधिकारिक नहीं है।लाखों की तादाद में या करोडो़ं की तादाद में यह डाटाचोरी हुई है या नहीं है,संबंधित बैंको की ओर से अपना कारोबार बचाने की गरज से इसका खुलासा हो नहीं रहा है। भारतीय स्टेट बैंक जिस तरह खुलासा कर रहा है,निजी बैंको में उससे कहीं बड़ा संकट होने के बावजूद वे अपने व्यवसायिक हितों के मद्देनजर जब तक संभव है,कोई जानकारी साझा करने से बचेंगे।बहरहाल अब बैंकों ने अपने ग्राहकों से पिन बदलवाने या फिर मौजूदा कार्ड ब्लॉक कर नया कार्ड देने की कवायद तो शुरू कर दी है। लेकिन सबसे खतरनाक बात तो यह है कि अभी तक किसी भी बैंक ने इस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं करवाई है और न ही सरकार को इस बारे में कोई सूचना ही दी है।मसलन महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सिक्योरिटी ने खुद बैंकों को खत लिखा है।
बैंक प्राथमिक स्तर पर तत्काल पिन नंबर बदलने की बात पर जोर दे रहे हैं। सवाल यह है कि जब बैंकिंग नेटवर्क ही सुरक्षित नहीं है तो नये सिरे से पिन बदलते हुए वह पिन भी हैक हो गया तो आपकी जमा पूंजी का क्या होगा,जिन्हें अपना पेंशन पीएफ वेतन वगैरह बैंक में जमा करना होता है,वे सारे लोग तो रातोंरात कौड़ी कौड़ी के लिए मोहताज हो जायेंगे।
फिर कोई जरुरी नहीं है कि वे तथ्य बैंकिंग सिस्टम से ही लीक हो और बैंकों के तमाम एहतियात के बावजूद वे तथ्य लीक न हों,इसका कोई पुख्ता इंतजाम तकनीक के मामले में सबसे ज्यादा विकसित सिस्टम और देशों के पास भी नहीं है।
बाजार के विस्तार के लिए तेज अबाध लेनदेन के लिए जो डिजिटल पेपरलैस अत्याधुनिक इंतजाम है,उसीके वाइरल हो जाने से नागरिकों की निजता,गोपनीयता असुरक्षित हो गयी है।डिजिटल लेन देन बेशक सुविधाजनक है और यह शत प्रतिसत तकनीक के मार्फत होता है।यह तकनीक मददगार है,इसमें भी कोई शक नहीं है।लेकिन अत्यधिक तकनीक निर्भर हो जाने के बाद वही तकनीक भस्मासुर बनकर आपका काम तमाम कर सकती है।
जल जंगल जमीन से बेदखली की तरह तकनीक से बेदखली की समस्या भी बेहद संक्रामक है।
साइबर अपराधी,अपराधी गिरोह से लेकर कारपोरेट कंपनियों के हाथों में हमारे तमाम तथ्य हमारी उंगलियों की छाप और आंखों की पुतलियों के साथ जमा आधार परियोजना के निजी उपक्रम के सौौजन्य से उपलब्ध हैं।बुनियादी सेवाओं और बुनियादी जरुरतों को पूरा करने के बहाने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके कोई भी सरकारी गैरसरकारी और संबंधित नागरिकों से ऐसे बेहद संवेदनशील तथ्यहासिल कर सकते हैं जैसी कोशिश मानीय सांसद के साथ हो चुकी है।
नेट बैंकिंग,एटीएम,डेबिट क्रेडिट कार्ड और मोबाइल बैंकिंग से श्रम और समय की बचत है और कागज की भी बचत है और सारा का सारा ई बाजार इसी कार्ड आधारित लेन देन पर निर्भर है तो वेतन,बीमा,पेंशन समेत तमाम सेक्टर में विनिवेश के तहत जो आम जनता का पैसा लग रहा है,वह निजी खातों से आधार नंबर के जरिये स्थानांतरित हो रहा है और यही आधार नंबर बैकिंग के लिए अब अनिवार्य है।
गौरतलब है कि पैन नंबर में नागरिकों के आय ब्यय का ब्यौरा ही लीक हो सकता है और इसलिए पैन नंबर आधारित बैंकिंग से उतना खतरा नहीं है।लेकिन आधार नंबर कुकिंग गैस से लेकर राशन कार्ड तक के लिए अनिवार्य हो जाने से आधार के साथ साथ आंखों की पुतलियां,उंगलियों की छाप समेत तमाम तथ्य और जानकारिया लीक हो जाने का बहुत बड़ा खतरा है,जिसके मुखातिब अब हम हैं।
सिर्फ शेयर बाजार तक यह संकट सीमाबद्ध नहीं है। सामाजिक परियोजनाों के माध्यम से एकदम सीमांत लोगों,गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले लोगों को भी दिहाड़ी और योजना लाभ,कर्ज वगैरह का भुगतान गैस सब्सिडी की तर्ज पर आधार नंबर से नत्थी कर दिया गया है।जिससे उनके बारे में भी कोई तथ्य गोपनीय नहीं है।
कुल मिलाकर नागरिकों के तमाम तथ्य डिजिटल तकनीक के जरिये जिस तरह सारकारी खुफिया निगरानी के लिए उपलब्ध हैं,उसीतरह बाजार के विस्तार के लिए ये तमाम तथ्यई मार्केट और ईटेलिंग के जरिये देशी विदेशी निजी कंपनियों को उपलब्ध हैं।जब सीधे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का संदेश पाकर आप फूले नहीं समाते और कभी यह समझने की कोशिश नहीं करते कि आपका सेल नंबर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को कैसे उपलब्ध हैं,उसीतरह चौबीसों घंटे रंग बिरंगे काल सेंटर से आपके नंबर पर होने वाले फोन से आपको अंदाजा नहीं लगता कि आपके बारे में तमाम तथ्य उन कंपनियों के पास हैं,जिसके लिए वे बाकायदा आपको टार्गेट कर रहे होते हैं।
बिल्कुल इसीतरह दुनियाभर के अपराधी,माफिया और हैकर के निशाने पर आप रातदिन हैं और मौजूदा बैंकिंग संकट सिर्फ टिप आप दि आइसबर्ग है।अब तो गाइडेड मिसाइल के साथ साथ गाइडेड बुलेट तक तकनीक विकसित है और आप रेलवे टिकट या ट्रेन टिकट बुकिंग के लिए जो तथ्य डिजिटल माध्यम से हस्तांतरित कर रहे हैं,किस प्वाइंट पर वे लीक या हैक हो सकते हैं,इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
बांग्ला दैनिक एई समय ने सांसद ऋतव्रत की आपबीती आज पहले पेज पर प्रकाशित की है।

