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Friday, January 1, 2016

नया साल मुबारक हो उन्हें भी जिनके खेत खलिहानो पर तनेंगे विकास के भव्य महल नदी तालाब बनेंगे, रिसाॅर्ट, वाॅटर पार्क जिनके बच्चे अपनी ही ज़मीनों पर विकसित होटलो में लगाएंगे झाड़ू पोंछा बेटियाँ बिकेंगी ऊँचे दामों पर जी.डी.पी. छूएगा आसमान

नया साल मुबारक
                 - हूबनाथ

        नया साल मुबारक हो
उन्हें भी
जिनके खेत खलिहानो पर
तनेंगे विकास के भव्य महल
        नदी तालाब बनेंगे, रिसाॅर्ट, वाॅटर पार्क
        जिनके बच्चे अपनी ही ज़मीनों पर
        विकसित होटलो में
        लगाएंगे झाड़ू पोंछा
        बेटियाँ बिकेंगी ऊँचे दामों पर
        जी.डी.पी. छूएगा आसमान

        नया साल मुबारक हो
उन्हें भी
जो थर्टी फस्र्ट की रात
सिकुड़तेे बेचते हैं गुब्बारे
बीनते हैं बीयर की बोतलें
और रम की टिन
गटर के किनारे
कुचले जाते हैं इम्पोर्टेड गाडि़यों से
सड़कों पर सोते हुए
बचे हुए लोग
        पाते हैं मुआवज़ा

        नया साल मुबारक हो
उन्हें भी
       जिनके बच्चे मारे गए
       बलात्कार के बाद
       जिनकी आॅंखें पथरागईं
       इंसाफ़ के इंतज़ार में
       जिनका जीवन गुज़र गया
       एक लम्बे बुख़ार में
       साठ सालों से अटका हुआ है
       थर्टी फस्र्ट जिनके संसार में

        नया साल मुबारक हो
उन्हें भी
       जो दंगों का इन्तज़ार करते हुए
       बाढ़ में मारे गए
       रोज़गार की तलाश में
       परदेशी समझ मारे गए
       विस्फोट से बचे
       तो भीड़ में मारे गए
       मरने के पहले
       और मरने के बाद भी
उन्हें
        नया साल मुबारक हो।

         ('लोअर परेल' संकलन से साभार)

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