Sustain Humanity


Tuesday, January 19, 2016

Kumar Gaurav Just now · आर्थिक विकलांगता, मानसिक दवाब इसका क्या अंत है ????? पीएच.डी के स्तर पर आकर आर्थिक अभाव की स्थिति और भविष्य का अन्धकार में चले जाना एक छात्र के लिए इससे अधिक मानसिक दवाब क्या हो सकता है..अक्सर मित्रों के साथ प्रशासनिक दवाब की बातें सुनकर गुस्सा आता था और वही जब पिछले कुछ महीनों से खुद के साथ हो रहा है तो रास्ते बंद होते नज़र आ रहे हैं....पिछले कुछ माह से फेलोशिप का ना मिलना और उसके ऊपर से आगे के करियर के ख़त्म होने की संभावना ने मुझे यह लिखने पर आखिर मजबूर कर दिया है.....नहीं जानता कि इसके क्या प्रभाव होंगे हो सकता है प्रशासन अपने असीमित शक्तियों के साथ मुझ पर टूट पड़े मैं लड़ सकता था पर अपना घर और आर्थिक विकलांगता ने मुझे असहाय कर दिया है...लगातार कई महीनों से केबिन के चक्कर लगाते-लगाते थक गया हूँ ऊपर से हजारों रूपए उधार, एक वक्त के खाने का मोहताज कर दिया गया....क्या किसी का गुनाह इतना बड़ा है कि हम मानवीयता के नीचले स्तर पर आ जाते हैं...मैं इस परिस्थिति में किसी को कुछ बोलने की हालत में नहीं हूँ बस आप लोगों से अपनी स्थिति साझा कर रहा हूँ शायद कुछ दिन खुद को बांकी रख पाने की हिम्मत जुटा सकूँ...

आर्थिक विकलांगता, मानसिक दवाब इसका क्या अंत है ?????
पीएच.डी के स्तर पर आकर आर्थिक अभाव की स्थिति और भविष्य का अन्धकार में चले जाना एक छात्र के लिए इससे अधिक मानसिक दवाब क्या हो सकता है..अक्सर मित्रों के साथ प्रशासनिक दवाब की बातें सुनकर गुस्सा आता था और वही जब पिछले कुछ महीनों से खुद के साथ हो रहा है तो रास्ते बंद होते नज़र आ रहे हैं....पिछले कुछ माह से फेलोशिप का ना मिलना और उसके ऊपर से आगे के करियर के ख़त्म होने की संभावना ने मुझे यह लिखने पर आखिर मजबूर कर दिया है.....नहीं जानता कि इसके क्या प्रभाव होंगे हो सकता है प्रशासन अपने असीमित शक्तियों के साथ मुझ पर टूट पड़े मैं लड़ सकता था पर अपना घर और आर्थिक विकलांगता ने मुझे असहाय कर दिया है...लगातार कई महीनों से केबिन के चक्कर लगाते-लगाते थक गया हूँ ऊपर से हजारों रूपए उधार, एक वक्त के खाने का मोहताज कर दिया गया....क्या किसी का गुनाह इतना बड़ा है कि हम मानवीयता के नीचले स्तर पर आ जाते हैं...मैं इस परिस्थिति में किसी को कुछ बोलने की हालत में नहीं हूँ बस आप लोगों से अपनी स्थिति साझा कर रहा हूँ शायद कुछ दिन खुद को बांकी रख पाने की हिम्मत जुटा सकूँ...