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Sunday, February 21, 2016

सोनी सोरी के चेहरे पर तेजाब फेंक दी जाती है और पाश्र्व से भारत माता के नारे की आवाज सुनाई देती है । यह pradhanmantri नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ आने के ठीक पहले की रात की बात है । भय से भरा घिनावन समय है यह । लोगों में भय है लेकिन बौखलाहट भी है । यही बौखलाहट उम्मीद है ।


Ranjit Verma

सोनी सोरी के चेहरे पर तेजाब फेंक दी जाती है और पाश्र्व से भारत माता के नारे की आवाज सुनाई देती है । यह pradhanmantri नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ आने के ठीक पहले की रात की बात है । भय से भरा घिनावन समय है यह । लोगों में भय है लेकिन बौखलाहट भी है । यही बौखलाहट उम्मीद है । 
भय मेरे अंदर भी काम कर रहा था । रांची में जो घटना घटी थी उसके बाद अंदर से मन हिल गया था । सोचा छत्तीसगढ जाने की योजना रद्द कर दूं । सियाराम शर्मा को फोन भी कर दिया उन्होंने हामी भी भर दी । लेकिन सुबह लगा कि अगर डर से नहीं गया तो जीवन भर खुद को माफ नहीं कर पाऊंगा । सुबह फोन कर के कह दिया कि आ रहा हूं । लेकिन भय भिलाई में भी था । बैनर पर 'कविता : १६ मई के बाद' नहीं लिखा था हालांकि सब कुछ वैसे ही हुआ जैसा कि लिखे रहने पर होता । करीब बीस कवियों ने कविता पाठ किया और उपस्थिति ६० के करीब थी । इस आयोजन से पहले एकल कविता पाठ के लिये सियाराम शर्मा मुझे अपने कॉलेज ले गए थे । भय वहां भी था । 
भय रायगढ मे भी था जो सभी का अकेले अकेले पीछा कर रहा था । यहां बैनर में 'कविता : १६ मई के बाद तो लिखा था लेकिन टाउन हॉल में करने की जगह जहां पहले करने की उनकी योजना थी, तुलनात्मक रूप से सुरक्षित जगह पर किया गया । दोनों ही जगहों पर बाद में यह महसूस किया लोगों ने कि भय से निजात पाना है तो अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे ।


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